श्री सियावल्लभ शरण जी का जन्म ३ दिसम्बर १९९५ को बिहार के पटना जिले के मनेर ग्राम में एक दिव्य दम्पति पं० श्री सुनील प्रसाद और श्रीमति रेणु देवी के घर में हुआ | इन्होंने अपने माध्यमिक शिक्षा पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर से प्राप्त की | महाराज जी बाल्यकाल से ही भक्ति भाव में रमे थे , इसलिए उन्होंने पुनः श्री धाम वृन्दावन से अध्यात्मिक शिक्षा श्री नाथ धाम विद्यालय से ग्रहण की | उनके गुरु स्वामी सीताराम शरण महाराज जी हैं, जिनकी कृपा से उन्होंने ग्रंथो, महाकाव्यों और वैदिक दर्शन का ज्ञान प्राप्त किया | पूज्य महाराज श्री सियावल्लभ शरण जी ने १७ वर्ष की अवस्था में प्रथम बार श्रीमद्भागवत कथा का वाचन श्री चित्रकुट धाम में किया, जो की अब कथा की धारा पुरे भारतवर्ष में व्याप्त हो चुकी है | महाराज जी का संकल्प गौ सेवा एवं संरक्षण तथा भटके हुए युवाओं को सुपथ की ओर प्रेरित भगवद कथा के माध्यम से करना है | इनकी सरस सुमधुर वाणी का प्रभाव भक्तों के ह्रदय में भक्ति को जागृत करता है | श्रोताओं के अंतः पटल पर भगवद भक्ति का अमिट छाप पड़ता है जिससे उनका जीवन भक्ति में प्रकाशमय बन जाता है |