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*जय सियाराम*

जीवन का पूर्ण लाभ यही है कि इसे सद्कर्मों में व्यय किया जाय ।
प्रभु श्री राम के जीवन में हम जरा झाक कर देखे चौदह वर्ष के वनवास में भी इतने विषम परिस्थितियों में भी सारे कष्टों को झेलते हुए सत्कर्म करते रहे ।

ऐसे कहा गया है आपत्ति काले मर्यादा नास्ति पर श्री राम जी ने आपत्ति काल में भी मर्यादा का ऐसा पालन किए की श्री राम से मर्यादापुरूषोत्तम श्री राम बन गए ।

अपने चरित्र के द्वारा जीव मात्र को शिक्षा दी सम दम नियम नीति से चलो समय सदा सद्कर्मों में व्यय करो ।

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