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*जय सियाराम*

*कादर मन कर एक आधारा* ।
*देव देव आलसी पुकारा* ।।
जो आलसी है प्रमादी है वही भाग्य पर हर काम छोड़ देते है और कहते है जो भाग्य में होगा मिल जाएगा ।

पर इसके विपरीत पुरुषार्थी व्यक्ति पुरुषार्थ कर के ब्रह्मा के लेखनी को भी मिटा कर अपने भाग्य को खुद लिखते है ।

हर काम भाग्य के भरोसे छोड़ देना उचित नही ये लक्ष्मण जी कहते हैं । खुब मेहनत किया जाए फिर मेहनत का पुरुषार्थ का फल परमात्मा पर छोड़ दिया जाए ।

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